आपनी खूबसूरती का गुरुर ना कर इतना ये दोस्त,
तेरी खूबसूरती का वजूद मेरे दीवानेपन से है,
एसे तो चाँद भी खास खुबसूरत नहीं,
चाँद की खूबसूरती भी रात के अन्धेरेपन से है,
प्यार दिल मे दबा कर रखने मे क्या मज़ा,
प्यार तो पतंगे के जल जाने मे है,
पल दो पल मे खो जाये वो कैसा दीवानापन,
दीवानापन तो चोकर सा चाँद को निहारने मे है,
प्यार दो इंसानों के मिलने मे नहीं,
प्यार तो दो रूहों के मिलने मे है,
प्यार एक तरफा नहीं होता,
प्यार धागे के जलने पर मोम की तरह पिघलने मे है..
हरे कृष्णा....
गौरव मणि खनाल