Tuesday, June 5, 2012

प्यार

 आपनी खूबसूरती का गुरुर ना कर इतना ये दोस्त,
 तेरी खूबसूरती का वजूद मेरे दीवानेपन से है,
 एसे तो चाँद भी खास खुबसूरत नहीं,
 चाँद की खूबसूरती भी रात के अन्धेरेपन से है,

प्यार दिल मे दबा कर रखने मे क्या मज़ा,
प्यार तो पतंगे के जल जाने मे है,
पल दो पल मे खो जाये वो कैसा दीवानापन,
दीवानापन तो चोकर सा चाँद को निहारने मे है,

प्यार दो इंसानों के मिलने मे नहीं,
प्यार तो दो रूहों के मिलने मे है,
प्यार एक तरफा नहीं होता,
प्यार धागे के जलने पर मोम की तरह पिघलने मे है..

  हरे कृष्णा....

गौरव मणि खनाल 

मोहब्त

वो केहते है क्या अंजाम होगा हमारी मोहब्त का,
मै केहता हु,मोहब्त मै अंजाम की कौन सोचता है,
दो जिस्म तो जुदा हो सकते है,
पर धड़कन को दिल से कौन जुदा कर सकता है,

वो केहते है कही साथ तो नहीं छोड़ोगे मेरा,
मै केहता हु बिन तेरे चलना सिखा ही नहीं मैंने,
गुलाब खिलता है जब तक जुड़ा है काली से,
अलग हो कर कली से फिर वो खिल नहीं सकता,

वो केहते है प्यार इतना सदा ही करोगे मुझसे,
मै केहता हु इस दिल मै है ही नही कुछ तेरी मोहब्त के सिवा,
मोहब्त पर वक़्त का पेहरा नहीं होता,
मोहब्त वक़्त के साथ कभी बूढ़ा नहीं होता,

वो कहते है अगर वो बेवफा निकले तो,
मै कहता हु बेपनाह मोहब्त करी हो जिससे उसे मै बेवफा कह नही सकता,
दरिया सागर से मिल नमकीन हो जाता है,
पर खुद को खोने के डर से दरिया सागर से दूर बह नहीं सकता....

गौरव मणि खनाल 

कितना बदल गया इंसान..

कितना बदल गया इंसान..

दूरियां घटी चाँद और धरती की बीच ,
और इंसान इंसान से दूर हो गया,
पानी पर चलना और हवा उड़ना सिख  लिया ,
धरती पर चलना भूल गया इंसान
कितना बदल गया इंसान,

मंगल  पर बसने को है तैयार,
धरती पर कैसे रहना भूल गया इंसान,
आधुनिकता के इस युग मे,
बूंद बूंद पानी के लिए लड़ने लगा इंसान,
कितना बदल गया इंसान,

महफ़िलो की गिनती बड़ी,
रिश्तो को निभाना भुला इंसान,
धन दौलत शान शौकत सब पाया,
आपने घर को भूल गया इंसान,
कितना बदल गया इंसान,

प्रजातांत्रिक देश समाज मे,
प्रेमतंत्र को भुला इंसान,
धर्म के नाम पर मर मिटने लगे,
धर्म जीना सिकाता है ये बात भुला इंसान,
कितना बदल गया इंसान,

ब्रह्मांड के कई राज़ खोले,
मन की गांठ खोलना भुला इंसान,
गर्व अभिमान की जंग मे,
इंसानियत बलि चढ़ा रहा इंसान,

धरती तप रही वन उपवन रो राहे,
बस हँस रहा इंसान बन हैवान,
पशु पक्षी चीख रहे नदी हो रही बेजान,
बेखबर आने वाले कल से,
इंसान मचा रहा हाहाकार,
कितना बदल गया इंसान... 

आभार 
गौरव मणि खनाल 

मत देख इस कदर


मत देख इस कदर मुड़कर मुझको,
तुझे मुझ से प्यार हो जायेगा,
सुना है जलते है लोग प्यार करने वालो से,
तेरा नाम ज़माने मे खा मो खाम खराब हो जायेगा,

मेरा क्या है मै तो आवारा हु,
आज यहाँ कल ठिकाना बदल जायेगा,
गर प्यार हो गया तुझे मुझे से, 
तो तेरा दिल भी आवारा हो जायेगा,

कहते है लोग एक अजीब कशिश है मेरी आखों मे,
देखे एक बार जो दीवाना हो जायेगा,
संभालना तू आपनी नज़र को जरा,
गर मिली मेरी आखों से वो भी मेरा दीवाना हो जायेगा,

मत देख इस कदर मुड़कर,
तेरा संभलना मुश्किल हो जायेगा,
गर हुआ जो दीदार मेरे चेहरे का,
फिर मुश्किल तेरा जाना हो जायेगा,

मत देख इस कदर मुड़कर,
तुझे मुझसे प्यार हो जायेगा... :) :) :) 

गौरव मणि खनाल 

तुम मेरे होते

तू साथ है ये भरोसा ही काफी है मेरे जीने के लिए,
पर तू पास होती तो जिंदगी शायद और भी खुबसूरत होती,
तेरी यादो का साथ ही काफी है हर गम भुलाने क लिए,
पर तू संग होती तो जिंदगी शायद और भी हसीन होती,
तेरी हँसी की एक झलक ही काफी है मेरे मुस्कुराने के लिए,
पर साथ हँसते हम दोनों तो जिंदगी शायद और भी रंगीन होती,
तेरी पायल की झंकार ही काफी है मेरे ह्रदय संगीत के  लिए,
पर साथ अगर तू भी गाये तो जिंदगी शायद और भी सुरमई होती,
य़ू तो हर ख्वाइश पूरी हुई है मेरी,
पर तुम मेरे होते तो शायद जिंदगी से और कोई ख्वाइश ना रहती,

गौरव मणि खनाल