वो केहते है क्या अंजाम होगा हमारी मोहब्त का,
मै केहता हु,मोहब्त मै अंजाम की कौन सोचता है,
दो जिस्म तो जुदा हो सकते है,
पर धड़कन को दिल से कौन जुदा कर सकता है,
वो केहते है कही साथ तो नहीं छोड़ोगे मेरा,
मै केहता हु बिन तेरे चलना सिखा ही नहीं मैंने,
गुलाब खिलता है जब तक जुड़ा है काली से,
अलग हो कर कली से फिर वो खिल नहीं सकता,
वो केहते है प्यार इतना सदा ही करोगे मुझसे,
मै केहता हु इस दिल मै है ही नही कुछ तेरी मोहब्त के सिवा,
मोहब्त पर वक़्त का पेहरा नहीं होता,
मोहब्त वक़्त के साथ कभी बूढ़ा नहीं होता,
वो कहते है अगर वो बेवफा निकले तो,
मै कहता हु बेपनाह मोहब्त करी हो जिससे उसे मै बेवफा कह नही सकता,
दरिया सागर से मिल नमकीन हो जाता है,
पर खुद को खोने के डर से दरिया सागर से दूर बह नहीं सकता....
गौरव मणि खनाल
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